33 महीने के अपने कार्यकाल में एक भी छात्र-छात्राओं को नहीं पढ़ाने का हवाला देते हुए अपनी तनख्वाह की कुल राशि लौटाने का दावा करने वाले असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. ललन कुमार शक और आशंकाओं के बीच घिरते नज़र आ रहे हैं.

मुज़फ़्फ़रपुर के नीतीश्वर सिंह कॉलेज में हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. ललन कुमार ने मंगलवार पांच जुलाई को बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरके ठाकुर को 23.82 लाख रुपये का चेक दिया था, लेकिन जिस अकाउंट नंबर का चेक उन्होंने दिया था उस खाते में महज़ 852 रुपये ही हैं. हालांकि स्वीप एफ़डी में क़रीब 1.15 लाख रुपये हैं जो खाते से लिंक है.

क्या है मामला?

यह प्रकरण मुजफ़्फ़रपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से जुड़ा है. दो दिन पहले ऐसी ख़बर आई कि इसके नीतीश्वर कॉलेज में हिंदी के सहायक प्राध्यापक डॉ. ललन कुमार ने कक्षा में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति लगातार शून्य रहने पर अपनी दो साल और नौ महीने की पूरी तनख़्वाह 23 लाख 82 हज़ार 228 रुपये एकमुश्त लौटा दी है. उन्होंने इस राशि का चेक कुलसचिव को सौंपा.

हालांकि प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक कुलसचिव ने पहले चेक लेने से इनकार कर दिया, लेकिन डॉक्टर ललन कुमार अपनी ज़िद पर अड़े रहे और चेक स्वीकार नहीं करने पर नौकरी तक छोड़ देने की बात की. आख़िरकार कुलसचिव ने चेक स्वीकार कर लिया.

इस संबंध में जब प्रोफ़ेसर डॉक्टर ललन कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “मैं अपने अध्यापन कार्य के प्रति कृतज्ञ महसूस नहीं कर पा रहा था और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बताये रास्ते और अंतरात्मा की आवाज़ पर नियुक्ति की तारीख़ से लेकर अब तक की समूची तनख़्वाह की राशि विश्वविद्यालय को समर्पित कर दी.”

डॉक्टर ललन कुमार से जब इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा था, “जब से यहाँ नियुक्त हुआ तब से कॉलेज में पढ़ाई का माहौल नहीं देखा. लगभग 11 सौ छात्र- छात्राओं का हिंदी में नामांकन है, लेकिन उनकी उपस्थिति लगभग शून्य रहने से वे शैक्षणिक दायित्व का निर्वहन नहीं कर पाए. ऐसे में मेरा वेतन लेना अनैतिक है.”

हालांकि इतने पैसे एकमुश्त कहां से आए ये पूछे जाने पर उन्होंने बताया था कि, “इतनी बड़ी राशि देने के लिए मैंने अपने कुछ सहयोगियों और मित्रों से आर्थिक सहायता ली है, लेकिन मुद्दा यह नहीं है. असल मुद्दा तो मुझे काम करने के अवसर देने से जुड़ा है.”

खाते में पैसे नहीं थे और चेक कॉलेज में जमा करवाया?

अब विश्वविद्यालय में यह चर्चा गर्म पर है कि डॉ. ललन कुमार ने ट्रांसफ़र कराने के लिए यह सब हथकंडा अपनाया था. इस मामले पर स्थानीय पत्रकार प्रेमांशु शेखर का कहना है कि “यह सब ट्रांसफ़र कराने को लेकर एक स्टंट सा था. साथ ही विश्वविद्यालय पर दबाव बनाकर मीडिया में चर्चा बंटोरने के लिए किया गया था.”

उनके अनुसार, “असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ललन कुमार ने विश्वविद्यालय को जिस भारतीय स्टेट बैंक, मिठनपुरा शाखा का चेक दिया था, उससे अपनी नियुक्ति की तिथि 25 सितंबर, 2019 से मई, 2022 तक की सैलरी 23.82 लाख रुपये वापस किया था. लेकिन जिस दिन इन्होंने कुलसचिव को चेक दिया था उस दिन इनके खाते में 968.95 रुपये ही थे.”

वे कहते हैं, “जब आपके खाते में उतने रुपये थे ही नहीं तो आपने चेक विश्वविद्यालय में कैसे जमा कर दिया. उनका यह आचरण संदेह पैदा करता है और साथ ही सच्चाई भी बता देता है.”

असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ललन कुमार का फ़ोन ऑफ़

इस संबंध में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ललन कुमार की प्रतिक्रिया लेने के लिए बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन बुधवार तक बेहद मुखर रहने वाले असिस्टेंट प्रोफ़ेसर का मोबाइल फ़ोन लगातार स्विच ऑफ़ ही रहा.

अब इस समूचे प्रकरण की समीक्षा विश्वविद्यालय स्तर पर कराई जा रही है. पूरे मामले पर नीतीश्वर कॉलेज के प्राचार्य प्रोफ़ेसर मनोज कुमार से भी विश्वविद्यालय ने जवाब माँगा है.

इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरके ठाकुर ने बताया कि प्रोफ़ेसर ललन कुमार ने गुरुवार को नीतीश्वर कॉलेज के प्राचार्य को एक माफ़ीनामा भेजा है. प्राचार्य के माध्यम से वह माफ़ीनामा विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ है.

डॉ ललन कुमार

उन्होंने पत्र में लिखा है कि ‘मैं किसी निर्णय की स्थिति में खुद को नहीं पा रहा था. मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाया और भावावेश में मैंने आवेदन के साथ अपनी समुचित वेतन राशि का चेक प्रस्तुत किया, लेकिन बाद में कुछ वरिष्ठ लोगों और सहकर्मियों के साथ चर्चा करने के बाद मुझे यह बात समझ में आ गई कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की व्यवस्थाओं के अनुरूप ही आचरण अपेक्षित है. मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करूँगा कि भविष्य में कोई भी भावावेशपूर्ण कदम न उठाया जाए. इस संदर्भ में जो भी मौखिक या लिखित वक्तव मेरे द्वारा जारी किए गए हैं उन सबको मैं सहर्ष वापस लेता हूँ.’

प्रोफ़ेसर ललन कुमार पर कार्रवाई के बारे में कुलसचिव का कहना है कि “इस संबंध में प्राचार्य से जवाब माँगा है. प्राचार्य ने असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ललन कुमार की ओर से जारी माफ़ीनामा आज मुझे भेजा है. प्राचार्य के जवाब के बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी.”

कौन हैं डॉ. ललन कुमार

मूल रूप से वैशाली ज़िले के निवासी डॉ. ललन कुमार सामान्य किसान परिवार से आते हैं.

इंटर की पढ़ाई बिहार से पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, जवाहर लाल विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की.

डॉक्टर ललन कुमार की विश्वविद्यालय में नियुक्ति 24 सितंबर, 2019 को हुई थी.

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